बाहर हंसी का साज है अंदर सब उदास है
जीवन का एक राज है शायद यही जीने का अंदाज है
दिन धुंधला सा होता है रातें भी स्याह सी होती है
यादों की परतें जमती है शायद यही जीने का अंदाज है
गम का बादल छा जाता है आंसु की बारिश होती है
पल-पल में बिखर सा जाता है शायद यही जीने का अंदाज़ है
खामोश निगाहे खोजती है नजरों में लिए अरमान कोई
सब कुछ फिर मिट सा जाता है शायद यही जीने का अंदाज है
